इस्कॉन मंदिर वृंदावन (iskcon mandir vrindavan)

श्री कृष्ण बलराम मंदिर को इस्कॉन मंदिर (Iskcon Mandir Vrindavan ) कहा जाता है | यह वृंदावन में स्थित है आपको बता दे की इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस (इस्कॉन) द्वारा निर्मित पहला मंदिर होने के लिए स्वीकार किया जाता है। इस मंदिर का इतिहास काफी पुराना है और यह मन्दिर कृष्ण मंदिर के नाम से दुनियाभर में जाना जाता है |

आपको बता दे की इस्कॉन पंथ द्वारा 1975 में निर्मित, मंदिर की नींव स्वयं स्वामी प्रभुपाद (इस्कॉन के संस्थापक) ने रखी थी। यह मंदिर वृंदावन में रमन रेती में स्थित, मंदिर तक उत्तर प्रदेश के पश्चिमी भाग से नियमित परिवहन द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है।

इस्कॉन मंदिर का पूरा नाम इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर कृष्णा कॉन्शियसनेस(ISKCON) है। इसकी स्थापना भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद ने 1966 में न्यूयॉर्क में की थी। इस समाज की मूल मान्यताएं भागवद गीता पर आधारित हैं। इस्कॉन मंदिर का सम्बन्ध गौडीय वैष्णव संप्रदाय से है। जहां वैष्णव का अर्थ होता है भगवान विष्णु की पूजा और गौड़ का सम्बन्ध पश्चिम बंगाल के गौड़ प्रदेश से है। माना जाता है कि इसी जगह से वैष्णव संप्रदाय की शुरूआत हुई थी। मूल रूप से भगवान श्री कृष्ण के प्रति अपने विचारों और कार्यों को समर्पित, जिसमें भक्ति योग का अभ्यास, प्रसार करने के लिए इस्कॉन संस्था बनाई गई थी।

इस्कॉन मंदिर का इतिहास –

इस्कॉन मंदिर (Iskcon Mandir Vrindavan ) मंदिर का इतिहास काफी पुराना है | इस्कॉन के उपदेश और प्रथाओं को श्री चैतन्य महाप्रभु (1486-1532) द्वारा शुरू किया गया और संहिताबद्ध किया गया था | यह स्वयं भगवान श्रीकृष्ण के अवतार थे, माना जाता है कि स्वामी प्रभुपाद भारत में कई जगहों पर इस्कॉन मंदिर बनवाना चाहते थे। उसके बाद 1975 में उन्होंने वृंदावन में यह मंदिर बनवाया था। मंदिर के संस्थापक स्वामी प्रभुपाद की 1977 में मृत्यु हो गई, मंदिर परिसर में उनका स्मारक बनाया गया है। यह मंदिर श्रीकृष्ण बलराम मंदिर के रूप में जाना जाता है |

इस्कॉन मंदिर से जुड़ी कथा

इस्कॉन मंदिर (Iskcon Mandir Vrindavan ) मंदिर यमुना नदी के किनारे स्थित है। यह माना जाता है, की पांच हजार वर्ष पहले जिस स्थान पर भगवान श्रीकृष्ण और बलराम अपनी गायों को चराने आते थे,  और यहा पर ही खेल खेलते थे | इस जगह पर उन्होंने गोपियों के साथ लीलाएं की थी | ठीक उसी स्थान पर इस्कॉन मंदिर का निर्माण किया गया है। यह स्थान श्रीकृष्ण और बलराम के बचपन की विभिन्न कहानियों से जुड़ा हुआ है। इसलिए यहा आपको दोनों की ही मूर्ति देखने को मिलती है |

इस्कॉन मंदिर से जुड़े रोचक तथ्य –

  • इस्कॉन मन्दिर सर्वश्रेष्ठ सगंममर के मेररज से बना हुआ एक सुंदर मंदिर है |
  • यह पर हर साल श्री कृष्ण जन्माष्टमी का त्यौहार बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है |
  • इस मंदिर में तीन वेदियां हैं। इस्कॉन आइकॉनिक के मध्य में श्री कृष्ण और बलराम की पवित्र आत्माएं हैं।
  • मंदिर का वातारण शाम को होने वाले श्रीकृष्ण आरती को लोकप्रिय बनाया गया है, जिसे देखने के लिए दूर दूर से लोग यहा आते है |
  • मंदिर में नित्यानंद के साथ चैतन्य महाप्रभु और धात्विक गुरु स्वामी देवगुरु और धात्विक स्तब्ध है |
  • यह मंदिर आपको कृष्ण के चरित्र की विशेषताएँ के बारे में बताता है |
  • अंदर का वातावरण बहुत ही तनावमुक्त है यहा श्रद्धालु शांति के साथ समय समय बिताना पसंद करते हैं।
  • इस मंदिर का उल्लेख इस्लाम धर्म की किताब में देखा जा सकता है |

इस्कॉन मंदिर वृंदावन केसे पहुचे –

हवाईजहाज से –

यदि आप इस्कॉन मंदिर (Iskcon Mandir Vrindavan )  हवाई से सफर करना चाहते है, तो मथुरा 46 किमी दूर खेरिया हवाई अड्डा (AGR) स्थित है | यहा से आगरा, उत्तर प्रदेश मथुरा 136 किमी दूर इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा (DEL), नई दिल्ली स्थित है जिसके माध्यम से पहुच सकते है |

ट्रेन द्वारा इस्कॉन मंदिर –

देश के अन्य प्रमुख शहरों से मथुरा के लिए नियमित ट्रेनें हैं, यहा का सफर ट्रेन के माध्यम से बहुत सरल और बेहतर है | आप यहा रेलवे स्टेशन: मथुरा जंक्शन (एमटीजे), मथुरा कैंट। (एमआरटी) से सीधे पहुच सकते है | ट्रेन के बाद आप बस द्वारा मंदिर तक आ सकते है | Saputara

सड़क मार्ग द्वारा –

यहा से देश के सभी प्रमुख शहर जुड़े हुए है, जिससे बस द्वारा आना जाना संभव है | मथुरा नियमित बसों के माध्यम से देश के अन्य प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।

इस तरह से इस्कॉन मंदिर (Iskcon Mandir Vrindavan ) पहुच कर आप भगवान के दर्शन कर सकते है |

-धन्यवाद

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